हाल क्या जानूँ। अब आप ही तय करा दीजिए। गरीब आदमी हूँ, बाल-बच्चे जिएँगे।
जैनब-सच-सच कहना, यह मुआमला दब जाए, तो कहाँ तक दोगे?
बजरंगी-बेगम साहब, 50 रुपये तक देने को तैयार हूँ।
जैनब-तुम भी गजब करते हो, 50 रुपये ही में इतना बड़ा काम निकालना चाहते हो?
रकिया-(धीरे से) बहन, कहीं बिदक न जाए।
बजरंगी-क्या करूँ, बेगम साहब, गरीब आदमी हूँ। लड़कों को दूध-दही जो कुछ हुकुम होगा, खिलाता रहूँगा; लेकिन नगद तो इससे ज्यादा मेरा किया न होगा।
हाल क्या जानूँ। अब आप ही तय करा दीजिए। गरीब आदमी हूँ, बाल-बच्चे जिएँगे।
जैनब-सच-सच कहना, यह मुआमला दब जाए, तो कहाँ तक दोगे?
बजरंगी-बेगम साहब, 50 रुपये तक देने को तैयार हूँ।
जैनब-तुम भी गजब करते हो, 50 रुपये ही में इतना बड़ा काम निकालना चाहते हो?
रकिया-(धीरे से) बहन, कहीं बिदक न जाए।
बजरंगी-क्या करूँ, बेगम साहब, गरीब आदमी हूँ। लड़कों को दूध-दही जो कुछ हुकुम होगा, खिलाता रहूँगा; लेकिन नगद तो इससे ज्यादा मेरा किया न होगा।