रंगभूमि - Rangbhumi

जितनी बेरुखी से काम लो, उतना एतबार बढ़ता है।

रकिया-क्या करूँ बहन, मैं डरती हूँ कि कहीं बहुत सख्ती से निशाना खता न कर जाए।

जैनब-वह अहीर रुपये जरूर लाएगा। ताहिर को आज ही से भरना शुरू कर दो। बस, अजाब का खौफ दिलाना चाहिए। उन्हें हत्थे चढ़ाने का यही ढंग है।

रकिया-और कहीं साहब न माने, तो?

जैनब-तो कौन हमारे ऊपर नालिश करने जाता है।

ताहिर अली खाना खाकर लेटे थे कि जैनब ने जाकर कहा-साहब दूसरों की जमीन क्यों लिए लेते हैं? बेचारे रोते फिरते हैं।


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जितनी बेरुखी से काम लो, उतना एतबार बढ़ता है।

रकिया-क्या करूँ बहन, मैं डरती हूँ कि कहीं बहुत सख्ती से निशाना खता न कर जाए।

जैनब-वह अहीर रुपये जरूर लाएगा। ताहिर को आज ही से भरना शुरू कर दो। बस, अजाब का खौफ दिलाना चाहिए। उन्हें हत्थे चढ़ाने का यही ढंग है।

रकिया-और कहीं साहब न माने, तो?

जैनब-तो कौन हमारे ऊपर नालिश करने जाता है।

ताहिर अली खाना खाकर लेटे थे कि जैनब ने जाकर कहा-साहब दूसरों की जमीन क्यों लिए लेते हैं? बेचारे रोते फिरते हैं।


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