रंगभूमि - Rangbhumi

सिध्दांतों और नियमों को पीस डालती है। आदमी जितना ही नि:स्पृह होता है, उपकार का बोझ उसे उतना ही असह्य होता है। राजा साहब ने इस मामले को जॉन सेवक क्+ी इच्छानुसार तय कर देने का वचन दिया, और मिस्टर सेवक अपनी सफलता पर फूले हुए घर आए।

स्त्री ने पूछा-क्या तय कर आए?

जॉन सेवक-वही, जो तय करने गया था।

स्त्री -शुक्र है, मुझे आशा न थी।

जॉन सेवक-यह सब सोफी के एहसान की बरकत है। नहीं तो यह महाशय सीधो मुँह से बात करनेवाले न थे। यह उसी के आत्मसमर्पण की शक्ति है,


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सिध्दांतों और नियमों को पीस डालती है। आदमी जितना ही नि:स्पृह होता है, उपकार का बोझ उसे उतना ही असह्य होता है। राजा साहब ने इस मामले को जॉन सेवक क्+ी इच्छानुसार तय कर देने का वचन दिया, और मिस्टर सेवक अपनी सफलता पर फूले हुए घर आए।

स्त्री ने पूछा-क्या तय कर आए?

जॉन सेवक-वही, जो तय करने गया था।

स्त्री -शुक्र है, मुझे आशा न थी।

जॉन सेवक-यह सब सोफी के एहसान की बरकत है। नहीं तो यह महाशय सीधो मुँह से बात करनेवाले न थे। यह उसी के आत्मसमर्पण की शक्ति है,


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