आविर्भाव हो गया था। इस समय वह बैठा हुआ कुछ लिख रहा था। जॉन सेवक को आते देखकर वहाँ आया कि देखूँ, क्या खबर लाए हैं। जमीन के मिलने में जो कठिनाइयाँ उपस्थित हो गई थीं, उनसे उसे आशा हो गई थी कि कदाचित् कुछ दिनों तक इस बंधान में न फँसना पड़े। जॉन सेवक की सफलता ने वह आशा भंग कर दी। मन की इस दशा में माता के अंतिम शब्द उसे बहुत प्रिय मालूम हुए। बोला-मामा, अगर आपका विचार है कि सोफी वहाँ निरादर और अपमान सह रही है, और उकताकर स्वयं चली आवेगी,
आविर्भाव हो गया था। इस समय वह बैठा हुआ कुछ लिख रहा था। जॉन सेवक को आते देखकर वहाँ आया कि देखूँ, क्या खबर लाए हैं। जमीन के मिलने में जो कठिनाइयाँ उपस्थित हो गई थीं, उनसे उसे आशा हो गई थी कि कदाचित् कुछ दिनों तक इस बंधान में न फँसना पड़े। जॉन सेवक की सफलता ने वह आशा भंग कर दी। मन की इस दशा में माता के अंतिम शब्द उसे बहुत प्रिय मालूम हुए। बोला-मामा, अगर आपका विचार है कि सोफी वहाँ निरादर और अपमान सह रही है, और उकताकर स्वयं चली आवेगी,