लड़ने पर तुला हुआ है। खासकर नायकराम पंडा बहुत बिगड़ा हुआ है। वह बड़ा खौफनायक आदमी है। जाने कितनी बार फौजदारियाँ कर चुका है। अगर ये सब दिक्कतें किसी तरह दूर भी हो जाएँ, तो भी मैं आपसे यही अर्ज करूँगा कि इसके बजाए किसी दूसरी जमीन की फिक्र कीजिए।
जॉन सेवक-यह क्यों?
ताहिर-हुजूर, यह सब अजाब का काम है। सैंकड़ों आदमियों का काम उस जमीन से निकलता है, सबकी गायें वहीं चरती हैं, बरातें ठहरती हैं, प्लेग के दिनोें में लोग वहीं झोंपड़े डालते हैं। वह जमीन निकल गई,
लड़ने पर तुला हुआ है। खासकर नायकराम पंडा बहुत बिगड़ा हुआ है। वह बड़ा खौफनायक आदमी है। जाने कितनी बार फौजदारियाँ कर चुका है। अगर ये सब दिक्कतें किसी तरह दूर भी हो जाएँ, तो भी मैं आपसे यही अर्ज करूँगा कि इसके बजाए किसी दूसरी जमीन की फिक्र कीजिए।
जॉन सेवक-यह क्यों?
ताहिर-हुजूर, यह सब अजाब का काम है। सैंकड़ों आदमियों का काम उस जमीन से निकलता है, सबकी गायें वहीं चरती हैं, बरातें ठहरती हैं, प्लेग के दिनोें में लोग वहीं झोंपड़े डालते हैं। वह जमीन निकल गई,