रंगभूमि - Rangbhumi

धर्मशाला, मंदिर और कुआँ बनवाने का विचार कर रहे हैं।

राजा साहब-वाह, तब तो बात ही बन गई। क्यों सूरदास, तुम इस जमीन में से 9 बीघे मिस्टर जॉन सेवक को दे दो। उनसे जो रुपये मिलें, उन्हें धर्म-कार्य में लगा दो। इस तरह तुम्हारी अभिलाषा भी पूरी हो जाएगी और काम भी निकल जाएगा। दूसरों से इतने अच्छे दाम न मिलेंगे। बोलो, कितने रुपये दिला दूँ?

नायकराम सूरदास को मौन देखकर डरे कि कहीं यह इनकार कर बैठा, तो मेरी बात गई! बोले-सूरे, हमारे मालिक को जानते हो न,


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धर्मशाला, मंदिर और कुआँ बनवाने का विचार कर रहे हैं।

राजा साहब-वाह, तब तो बात ही बन गई। क्यों सूरदास, तुम इस जमीन में से 9 बीघे मिस्टर जॉन सेवक को दे दो। उनसे जो रुपये मिलें, उन्हें धर्म-कार्य में लगा दो। इस तरह तुम्हारी अभिलाषा भी पूरी हो जाएगी और काम भी निकल जाएगा। दूसरों से इतने अच्छे दाम न मिलेंगे। बोलो, कितने रुपये दिला दूँ?

नायकराम सूरदास को मौन देखकर डरे कि कहीं यह इनकार कर बैठा, तो मेरी बात गई! बोले-सूरे, हमारे मालिक को जानते हो न,


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