देने जोग हूँ कि जवाब दूँ? लेकिन इतना तो सरकार जानते ही हैं कि लोग उँगली पकड़ते-पकड़ते पहुँचा पकड़ लेते हैं।
साहब पहले तो न बोलेंगे, फिर धीरे-धीरे हाता बना लेंगे, कोई मंदिर में जाने न पाएगा, उनसे कौन रोज-रोज लड़ाई करेगा।
नायकराम-दीनबंधु, सूरदास ने यह बात पक्की कही, बड़े आदमियों से कौन लड़ता फिरेगा?
राजा साहब-साहब क्या करेंगे, क्या तुम्हारा मंदिर खोदकर फेंक देंगे?
नायकराम-बोलो सूरे, अब क्या कहते हो?
सूरदास-सरकार,
देने जोग हूँ कि जवाब दूँ? लेकिन इतना तो सरकार जानते ही हैं कि लोग उँगली पकड़ते-पकड़ते पहुँचा पकड़ लेते हैं।
साहब पहले तो न बोलेंगे, फिर धीरे-धीरे हाता बना लेंगे, कोई मंदिर में जाने न पाएगा, उनसे कौन रोज-रोज लड़ाई करेगा।
नायकराम-दीनबंधु, सूरदास ने यह बात पक्की कही, बड़े आदमियों से कौन लड़ता फिरेगा?
राजा साहब-साहब क्या करेंगे, क्या तुम्हारा मंदिर खोदकर फेंक देंगे?
नायकराम-बोलो सूरे, अब क्या कहते हो?
सूरदास-सरकार,