को समझाया; किंतु वह इंदु का निमंत्रण अस्वीकार न करना चाहती थी। उसने प्रण कर लिया था कि अब घर न जाऊँगी।
तीसरे दिन राजा महेंद्रकुमार इंदु को विदा कराने आए, तो इंदु ने और बातों के साथ सोफी को साथ ले चलने का जिक्र छेड़ दिया। बोली-मेरी जी वहाँ अकेले घबराया करता है, मिस सोफ़िया के रहने से मेरा जी बहल जाएगा।
महेंद्र.-क्या मिस सेवक अभी तक वहीं हैं?
इंदु-बात यह है कि उनके धार्मिक विचार स्वतंत्रा हैं, और उनके घरवाले उनके
को समझाया; किंतु वह इंदु का निमंत्रण अस्वीकार न करना चाहती थी। उसने प्रण कर लिया था कि अब घर न जाऊँगी।
तीसरे दिन राजा महेंद्रकुमार इंदु को विदा कराने आए, तो इंदु ने और बातों के साथ सोफी को साथ ले चलने का जिक्र छेड़ दिया। बोली-मेरी जी वहाँ अकेले घबराया करता है, मिस सोफ़िया के रहने से मेरा जी बहल जाएगा।
महेंद्र.-क्या मिस सेवक अभी तक वहीं हैं?
इंदु-बात यह है कि उनके धार्मिक विचार स्वतंत्रा हैं, और उनके घरवाले उनके