रंगभूमि - Rangbhumi

और उनमें केवल मात्रा का भेद है। भक्ति में सम्मान और प्रेम में सेवाभाव का आधिाक्य होता है। प्रेम के लिए धर्म की विभिन्नता कोई बंधान नहीं है। ऐसी बाधाएँ उस मनोभाव के लिए हैं, जिसका अंत विवाह है, उस प्रेम के लिए नहीं, जिसका अंत बलिदान है।

प्रभु सेवक-मैंने तुम्हें जता दिया, यहाँ से चलने के लिए तैयार रहो।

सोफ़िया-मगर घर पर किसी से इसकी चर्चा करने की जरूरत नहीं।

प्रभु सेवक-इससे निश्चिंत रहो।

सोफ़िया-कुछ निश्चय हुआ, यहाँ से उनके जाने का कब इरादा है?


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और उनमें केवल मात्रा का भेद है। भक्ति में सम्मान और प्रेम में सेवाभाव का आधिाक्य होता है। प्रेम के लिए धर्म की विभिन्नता कोई बंधान नहीं है। ऐसी बाधाएँ उस मनोभाव के लिए हैं, जिसका अंत विवाह है, उस प्रेम के लिए नहीं, जिसका अंत बलिदान है।

प्रभु सेवक-मैंने तुम्हें जता दिया, यहाँ से चलने के लिए तैयार रहो।

सोफ़िया-मगर घर पर किसी से इसकी चर्चा करने की जरूरत नहीं।

प्रभु सेवक-इससे निश्चिंत रहो।

सोफ़िया-कुछ निश्चय हुआ, यहाँ से उनके जाने का कब इरादा है?


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