प्रभु सेवक-बड़े पापा नाराज होंगे। आज उन्होंने तुम्हें बहुत आग्रह करके बुलाया है।
सोफी-जब तक मामा मुझे खुद आकर न ले जाएँगी, उस घर में कदम न रखूँगी।
यह कहकर सोफी लौट पड़ी, और प्रभु सेवक स्टेशन की तरफ चल दिए।
स्टेशन पर पहुँचकर विनय ने चारों तरफ ऑंखें फाड़-फाड़कर देखा, सोफी न थी।
प्रभु सेवक ने उसके कान में कहा-धर्मशाले तक यों ही रात के कपड़े पहने चली आई थी, वहाँ से लौट गई। जाकर खत जरूर लिखिएगा, वरना वह राजपूताने जा पहुँचेगी।
प्रभु सेवक-बड़े पापा नाराज होंगे। आज उन्होंने तुम्हें बहुत आग्रह करके बुलाया है।
सोफी-जब तक मामा मुझे खुद आकर न ले जाएँगी, उस घर में कदम न रखूँगी।
यह कहकर सोफी लौट पड़ी, और प्रभु सेवक स्टेशन की तरफ चल दिए।
स्टेशन पर पहुँचकर विनय ने चारों तरफ ऑंखें फाड़-फाड़कर देखा, सोफी न थी।
प्रभु सेवक ने उसके कान में कहा-धर्मशाले तक यों ही रात के कपड़े पहने चली आई थी, वहाँ से लौट गई। जाकर खत जरूर लिखिएगा, वरना वह राजपूताने जा पहुँचेगी।