के लिए इतना काफी थी। दोनों जब ताहिर अली को कहीं देखते, तो सुना-सुनाकर कहते-दुश्मन जाता है, उसका मुँह काला। मिठुआ कहता-जै शंकर, काँटा लगे न कंकर, दुश्मन को तंग कर। घीसू कहता-बम भोला, बैरी के पेट में गोला, उससे कुछ न जाए बोला।
ताहिर अली इन छोकरों की छिछोरी बातें सुनते और अनसुनी कर जाते। लड़कों के मुँह क्या लगें। सोचते-कहीं ये सब गालियाँ दे बैठें, तो इनका क्या बना लूँगा। वे दोनों समझते, डर के मारे नहीं बोलते, और शेर हो जाते। घीसू मिठुआ पर उन पेचों का अभ्यास करता,
के लिए इतना काफी थी। दोनों जब ताहिर अली को कहीं देखते, तो सुना-सुनाकर कहते-दुश्मन जाता है, उसका मुँह काला। मिठुआ कहता-जै शंकर, काँटा लगे न कंकर, दुश्मन को तंग कर। घीसू कहता-बम भोला, बैरी के पेट में गोला, उससे कुछ न जाए बोला।
ताहिर अली इन छोकरों की छिछोरी बातें सुनते और अनसुनी कर जाते। लड़कों के मुँह क्या लगें। सोचते-कहीं ये सब गालियाँ दे बैठें, तो इनका क्या बना लूँगा। वे दोनों समझते, डर के मारे नहीं बोलते, और शेर हो जाते। घीसू मिठुआ पर उन पेचों का अभ्यास करता,