तब मेम की जान बची। क्यों रकिया, तुम्हें याद है न?
रकिया-याद क्यों नहीं है, मैंने ही तो दुआ पढ़ी थी; साहब रात को दरवाजे पर पुकारता था।
जैनब-हम अपनी तरफ से किसी की बुराई नहीं चाहते; लेकिन जब जान पर आ बनती है, तो सबक भी ऐसा दे देते हैं कि जिंदगी भर न भूलें। अभी अपने पीर से कह दें, तो खुदा जाने क्या गजब ढाए। तुम्हें याद है रकिया, एक अहीर ने उन्हें दूध में पानी मिलाकर दिया था, उनकी जबान से इतना ही निकला-जा, तुझसे खुदा समझें। अहीर ने घर आकर देखा,
तब मेम की जान बची। क्यों रकिया, तुम्हें याद है न?
रकिया-याद क्यों नहीं है, मैंने ही तो दुआ पढ़ी थी; साहब रात को दरवाजे पर पुकारता था।
जैनब-हम अपनी तरफ से किसी की बुराई नहीं चाहते; लेकिन जब जान पर आ बनती है, तो सबक भी ऐसा दे देते हैं कि जिंदगी भर न भूलें। अभी अपने पीर से कह दें, तो खुदा जाने क्या गजब ढाए। तुम्हें याद है रकिया, एक अहीर ने उन्हें दूध में पानी मिलाकर दिया था, उनकी जबान से इतना ही निकला-जा, तुझसे खुदा समझें। अहीर ने घर आकर देखा,