रंगभूमि - Rangbhumi

रुपये लाकर दिए और पैरों पर गिरी; मगर बजरंगी से यह बात न कही। वह चली तो जैनब ने हँसकर कहा-खुदा देता है तो छप्पर फाड़कर देता है। इसका तो सान-गुमान भी न था। तुम बेसब्र हो जाती हो, नहीं तो मैंने कुछ-न-कुछ और ऐंठा होता। सवार को चाहिए कि बाग हमेशा कड़ी रखे।

सहसा साबिर ने आकर जैनब से कहा-आपको अब्बा बुलाते हैं। जैनब वहाँ गई, तो ताहिर अली को पड़े कराहते देखा। कुल्सूम से बोली-बीबी, गजब का तुम्हारा जिगर है। अरे भले आदमी, जाकर


526 of 2783

रुपये लाकर दिए और पैरों पर गिरी; मगर बजरंगी से यह बात न कही। वह चली तो जैनब ने हँसकर कहा-खुदा देता है तो छप्पर फाड़कर देता है। इसका तो सान-गुमान भी न था। तुम बेसब्र हो जाती हो, नहीं तो मैंने कुछ-न-कुछ और ऐंठा होता। सवार को चाहिए कि बाग हमेशा कड़ी रखे।

सहसा साबिर ने आकर जैनब से कहा-आपको अब्बा बुलाते हैं। जैनब वहाँ गई, तो ताहिर अली को पड़े कराहते देखा। कुल्सूम से बोली-बीबी, गजब का तुम्हारा जिगर है। अरे भले आदमी, जाकर


526 of 2783