मिसेज़ सेवक को हिंदुस्तानियों से चिढ़ थी। यद्यपि इसी देश के अन्न-जल से उनकी सृष्टि हुई थी, पर अपने विचार से हजरत ईसा की शरण में आकर, वह हिंदुस्तानियों के अवगुणों से मुक्त हो चुकी थीं। उनके विचार में यहाँ के आदमियों को खुदा ने सज्जनता, सहृदयता, उदारता, शालीनता आदि दिव्य गुणों से सम्पूर्णत: वंचित रक्खा है। वह योरपीय सभ्यता की भक्त थीं और आहार-विहार में उसी का अनुसरण करती थीं; खान-पान, वेश-भूषा, रहन-सहन, सब अंगरेजी थी;
मिसेज़ सेवक को हिंदुस्तानियों से चिढ़ थी। यद्यपि इसी देश के अन्न-जल से उनकी सृष्टि हुई थी, पर अपने विचार से हजरत ईसा की शरण में आकर, वह हिंदुस्तानियों के अवगुणों से मुक्त हो चुकी थीं। उनके विचार में यहाँ के आदमियों को खुदा ने सज्जनता, सहृदयता, उदारता, शालीनता आदि दिव्य गुणों से सम्पूर्णत: वंचित रक्खा है। वह योरपीय सभ्यता की भक्त थीं और आहार-विहार में उसी का अनुसरण करती थीं; खान-पान, वेश-भूषा, रहन-सहन, सब अंगरेजी थी;