के बहुत आग्रह करने पर भी अंगरेजी दावतों और पार्टियों में शरीक होती न थी, और नाच से तो उसे घृणा ही थी। किंतु मिसेज़ सेवक इन अवसरों को हाथ से न जाने देती थीं, यों काम न चलता तो विशेष प्रयत्न करके निमंत्रण-पत्र मँगवाती थीं। अगर स्वयं उनके मकान पर दावतें और पार्टियाँ बहुत कम होती थीं, तो इसका कारण ईश्वर सेवक की कृपणता थी।
यह समाचार सुनकर मिसेज़ सेवक बोलीं-देख ली हिन्दुस्तानियों की सज्जनता? फूले न समाते थे। अब तो मालूम
के बहुत आग्रह करने पर भी अंगरेजी दावतों और पार्टियों में शरीक होती न थी, और नाच से तो उसे घृणा ही थी। किंतु मिसेज़ सेवक इन अवसरों को हाथ से न जाने देती थीं, यों काम न चलता तो विशेष प्रयत्न करके निमंत्रण-पत्र मँगवाती थीं। अगर स्वयं उनके मकान पर दावतें और पार्टियाँ बहुत कम होती थीं, तो इसका कारण ईश्वर सेवक की कृपणता थी।
यह समाचार सुनकर मिसेज़ सेवक बोलीं-देख ली हिन्दुस्तानियों की सज्जनता? फूले न समाते थे। अब तो मालूम