मगर दो-चार रोज मालिश कर लेने से आराम हो जाएगा। आखिर यह मारपीट हुई क्यों?
ताहिर-हुजूर, यह सब उसी शैतान बजरंगी अहीर की हरकत है।
जॉन सेवक-मगर चोट खा जाने ही से आप निरापराध नहीं हो सकते। मैं इसे आपकी नादानी और असावधानी समझता हूँ। आप ऐसे आदमियों से उलझे ही क्यों? आपको मालूम है, इसमें मेरी कितनी बदनामी है?
ताहिर-मेरी तरफ से ज्यादती तो नहीं हुई।
जॉन सेवक-जरूर हुई, वरना देहातों में आदमी किसी से छेड़कर लड़ने नहीं आते।
मगर दो-चार रोज मालिश कर लेने से आराम हो जाएगा। आखिर यह मारपीट हुई क्यों?
ताहिर-हुजूर, यह सब उसी शैतान बजरंगी अहीर की हरकत है।
जॉन सेवक-मगर चोट खा जाने ही से आप निरापराध नहीं हो सकते। मैं इसे आपकी नादानी और असावधानी समझता हूँ। आप ऐसे आदमियों से उलझे ही क्यों? आपको मालूम है, इसमें मेरी कितनी बदनामी है?
ताहिर-मेरी तरफ से ज्यादती तो नहीं हुई।
जॉन सेवक-जरूर हुई, वरना देहातों में आदमी किसी से छेड़कर लड़ने नहीं आते।