वह अपनी जाति का प्राण है। क्यों? इसलिए कि वह सफल-मनोरथ हुआ। लेकिन कई साल पहले प्राणभय से अमेरिका भागा था, आज वह प्रधान है। इसलिए कि उसका विद्रोह सफल हुआ। मैंने राजा साहब को स्वपक्षी बना लिया, फिर रंग भरने का दोष कहाँ रहा?
इतने में फिटन बँगले पर आ पहुँची। ईश्वर सेवक ने आते ही आते पूछा-कहो, क्या कर आए?
जॉन सेवक ने गर्व से कहा-राजा को अपना मुरीद बना आया। थोड़ा-सा रंग तो जरूर भरना पड़ा, पर उसका असर बहुत अच्छा हुआ।
ईश्वर सेवक-खुदा,
वह अपनी जाति का प्राण है। क्यों? इसलिए कि वह सफल-मनोरथ हुआ। लेकिन कई साल पहले प्राणभय से अमेरिका भागा था, आज वह प्रधान है। इसलिए कि उसका विद्रोह सफल हुआ। मैंने राजा साहब को स्वपक्षी बना लिया, फिर रंग भरने का दोष कहाँ रहा?
इतने में फिटन बँगले पर आ पहुँची। ईश्वर सेवक ने आते ही आते पूछा-कहो, क्या कर आए?
जॉन सेवक ने गर्व से कहा-राजा को अपना मुरीद बना आया। थोड़ा-सा रंग तो जरूर भरना पड़ा, पर उसका असर बहुत अच्छा हुआ।
ईश्वर सेवक-खुदा,