मुझ पर थूकेगा। लोगों को ऐसी बातों पर कितनी जल्द विश्वास आ जाता है। मुहल्ले में कोई अपने दरवाजे पर खड़ा न होने देगा। ऊँह! भगवान् तो सबके मन की बात जानते हैं। आदमी का धरम है कि किसी को दु:ख में देखे, तो उसे तसल्ली दे। अगर अपना धरम पालने में भी कलंक लगता है, तो लगे, बला से। इसके लिए कहाँ तक रोऊँ? कभी-न-कभी तो लोगों को मेरे मन का हाल मालूम ही हो जाएगा।
किंतु जगधार और भैरों दोनों के मन में ईर्ष्या का फोड़ा पक रहा था। जगधार कहता था-मैंने तो समझा था,
मुझ पर थूकेगा। लोगों को ऐसी बातों पर कितनी जल्द विश्वास आ जाता है। मुहल्ले में कोई अपने दरवाजे पर खड़ा न होने देगा। ऊँह! भगवान् तो सबके मन की बात जानते हैं। आदमी का धरम है कि किसी को दु:ख में देखे, तो उसे तसल्ली दे। अगर अपना धरम पालने में भी कलंक लगता है, तो लगे, बला से। इसके लिए कहाँ तक रोऊँ? कभी-न-कभी तो लोगों को मेरे मन का हाल मालूम ही हो जाएगा।
किंतु जगधार और भैरों दोनों के मन में ईर्ष्या का फोड़ा पक रहा था। जगधार कहता था-मैंने तो समझा था,