रंगभूमि - Rangbhumi

है और मीठी नींद सोता है। हमको-तुमको रोटी-दाल भी दोनों जून नसीब नहीं होती है। उसे क्या कमी है, किसी ने चावल दिए, कहीं मिठाई पा गया, घी-दूध बजरंगी के घर से मिल ही जाता है। बल तो खाने से होता है।

भैरों-नहीं, यह बात नहीं। नसा खाने से बल का नास हो जाता है।

जगधार-कैसी उलटी बातें करते हो; ऐसा होता, तो फौज में गोरों को बारांडी क्यों पिलाई जाती? अंगरेज सभी शराब पीते हैं, तो क्या कमज़ोर होते हैं?

भैरों-आज सुभागी आती है, तो गला दबा देता हूँ।


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है और मीठी नींद सोता है। हमको-तुमको रोटी-दाल भी दोनों जून नसीब नहीं होती है। उसे क्या कमी है, किसी ने चावल दिए, कहीं मिठाई पा गया, घी-दूध बजरंगी के घर से मिल ही जाता है। बल तो खाने से होता है।

भैरों-नहीं, यह बात नहीं। नसा खाने से बल का नास हो जाता है।

जगधार-कैसी उलटी बातें करते हो; ऐसा होता, तो फौज में गोरों को बारांडी क्यों पिलाई जाती? अंगरेज सभी शराब पीते हैं, तो क्या कमज़ोर होते हैं?

भैरों-आज सुभागी आती है, तो गला दबा देता हूँ।


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