रंगभूमि - Rangbhumi

तो मैं न मानूँगा। मैंने अपनी ऑंखों से वह थैली देखी है। भैरों ने अपने मुँह से कहा है कि यह थैली झोंपड़े में धारन के ऊपर मिली। तुम्हारे बात कैसे मान लूँ?

सुभागी-तुमने थैली देखी है?

जगधार-हाँ, देखी नहीं तो क्या झूठ बोल रहा हूँ?

सुभागी-सूरदास, सच-सच बता दो, रुपये तुम्हारे हैं!

सूरदास-पागल हो गई है क्या? इनकी बातों में आ जाती है! भला मेरे पास रुपये कहाँ से आते?

जगधार-इनसे पूछ, रुपये न थे, तो इस घड़ी राख बटोरकर क्या ढूँढ़ रहे थे?


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तो मैं न मानूँगा। मैंने अपनी ऑंखों से वह थैली देखी है। भैरों ने अपने मुँह से कहा है कि यह थैली झोंपड़े में धारन के ऊपर मिली। तुम्हारे बात कैसे मान लूँ?

सुभागी-तुमने थैली देखी है?

जगधार-हाँ, देखी नहीं तो क्या झूठ बोल रहा हूँ?

सुभागी-सूरदास, सच-सच बता दो, रुपये तुम्हारे हैं!

सूरदास-पागल हो गई है क्या? इनकी बातों में आ जाती है! भला मेरे पास रुपये कहाँ से आते?

जगधार-इनसे पूछ, रुपये न थे, तो इस घड़ी राख बटोरकर क्या ढूँढ़ रहे थे?


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