रंगभूमि - Rangbhumi

कहा-क्या अब कोई ताड़ी पीनेवाला नहीं था? इतनी जल्दी क्यों दूकान बढ़ा दी?

ठाकुरदीन-मालूम नहीं, हाथ-पैर भी धोए हैं या वहाँ से सीधो ठाकुरजी के मंदिर में चले आए। अब सफाई तो कहीं रह ही नहीं गई।

भैरों-क्या मेरी देह में ताड़ी पुती हुई है?

ठाकुरदीन-भगवान् के दरबार में इस तरह न आना चाहिए। जात चाहे ऊँची हो या नीची; पर सफाई चाहिए ज़रूर।

भैरों-तुम यहाँ नित्य नहाकर आते हो?

ठाकुरदीन-पान बेचना कोई नीच काम नहीं है।

भैरों-जैसे पान,


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कहा-क्या अब कोई ताड़ी पीनेवाला नहीं था? इतनी जल्दी क्यों दूकान बढ़ा दी?

ठाकुरदीन-मालूम नहीं, हाथ-पैर भी धोए हैं या वहाँ से सीधो ठाकुरजी के मंदिर में चले आए। अब सफाई तो कहीं रह ही नहीं गई।

भैरों-क्या मेरी देह में ताड़ी पुती हुई है?

ठाकुरदीन-भगवान् के दरबार में इस तरह न आना चाहिए। जात चाहे ऊँची हो या नीची; पर सफाई चाहिए ज़रूर।

भैरों-तुम यहाँ नित्य नहाकर आते हो?

ठाकुरदीन-पान बेचना कोई नीच काम नहीं है।

भैरों-जैसे पान,


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