रंगभूमि - Rangbhumi

निकाल डालिए। फिर न कहना कि धोखे में वार किया। (धीरे से) एक ही हाथ में सारी किरस्तानी निकल जाएगी।

प्रभु सेवक-क्या कहा, जरा जोर से क्यों नहीं कहते?

नायकराम-(कुछ डरकर) कह तो रहा हूँ, जो अरमान हो, निकाल डालिए।

प्रभु सेवक-नहीं, तुमने कुछ और कहा है।

नायकराम-जो कुछ कहा है, वही फिर कह रहा हूँ। किसी का डर नहीं है।

प्रभु सेवक-तुमने गाली दी है।

यह कहते हुए प्रभु सेवक फिटन से नीचे उतर पड़े, नेत्रों से ज्वाला-सी निकलने लगी,


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निकाल डालिए। फिर न कहना कि धोखे में वार किया। (धीरे से) एक ही हाथ में सारी किरस्तानी निकल जाएगी।

प्रभु सेवक-क्या कहा, जरा जोर से क्यों नहीं कहते?

नायकराम-(कुछ डरकर) कह तो रहा हूँ, जो अरमान हो, निकाल डालिए।

प्रभु सेवक-नहीं, तुमने कुछ और कहा है।

नायकराम-जो कुछ कहा है, वही फिर कह रहा हूँ। किसी का डर नहीं है।

प्रभु सेवक-तुमने गाली दी है।

यह कहते हुए प्रभु सेवक फिटन से नीचे उतर पड़े, नेत्रों से ज्वाला-सी निकलने लगी,


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