रंगभूमि - Rangbhumi

सारी पहलवानी धारी रह गई।

बजरंगी-मैं तो जैसे घबरा गया।

जमुनी-चुप भी रहो। लाज नहीं आती। एक लौंडा आकर सबको पछाड़ गया। यह तुम लोगों के घमंड की सजा है।

ठाकुरदीन-बहुत सच कहती हो जमुनी, यह कौतुक देखकर यही कहना पड़ता है कि भगवान को हमारे गरूर की सजा देनी थी, नहीं तो क्या ऐसे-ऐसे जोधाा कठपुतलियों की भाँति खड़े रहते! भगवान् किसी का घमंड नहीं रखते।

नायकराम-यही बात होगी भाई, मैं अपने घमंड में किसी को कुछ न समझता था।

ये


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सारी पहलवानी धारी रह गई।

बजरंगी-मैं तो जैसे घबरा गया।

जमुनी-चुप भी रहो। लाज नहीं आती। एक लौंडा आकर सबको पछाड़ गया। यह तुम लोगों के घमंड की सजा है।

ठाकुरदीन-बहुत सच कहती हो जमुनी, यह कौतुक देखकर यही कहना पड़ता है कि भगवान को हमारे गरूर की सजा देनी थी, नहीं तो क्या ऐसे-ऐसे जोधाा कठपुतलियों की भाँति खड़े रहते! भगवान् किसी का घमंड नहीं रखते।

नायकराम-यही बात होगी भाई, मैं अपने घमंड में किसी को कुछ न समझता था।

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