नायकराम-पिस्तौल और बंदूक सब देखूँगा, अब तो लाग पड़ गई।
ठाकुरदीन-कोई अनुष्ठान करवा दिया जाए।
नायकराम-इसे बीच बाजार में फिटन रोककर मारूँगा, फिर कहीं मुँह दिखाने लायक न रहेगा। अब मन में यही ठन गई है।
सहसा भैरों आकर खड़ा हो गया। नायकराम ने ताना दिया-तुम्हें तो बड़ी खुशी हुई होगी भैरों!
भैरों-क्यों भैया?
नायकराम-मुझ पर मार न पड़ी है!
भैरों-क्या मैं तुम्हारा दुसमन हूँ भैया? मैंने तो अभी दूकान पर सुना। होस उड़
नायकराम-पिस्तौल और बंदूक सब देखूँगा, अब तो लाग पड़ गई।
ठाकुरदीन-कोई अनुष्ठान करवा दिया जाए।
नायकराम-इसे बीच बाजार में फिटन रोककर मारूँगा, फिर कहीं मुँह दिखाने लायक न रहेगा। अब मन में यही ठन गई है।
सहसा भैरों आकर खड़ा हो गया। नायकराम ने ताना दिया-तुम्हें तो बड़ी खुशी हुई होगी भैरों!
भैरों-क्यों भैया?
नायकराम-मुझ पर मार न पड़ी है!
भैरों-क्या मैं तुम्हारा दुसमन हूँ भैया? मैंने तो अभी दूकान पर सुना। होस उड़