रंगभूमि - Rangbhumi

था। धमकी से भी कोई काम न निकल सकता था। नायकराम ने उस पर लगे हुए कलंक का समर्थन करके उसे परास्त करने का निश्चय किया। बोला-मालूम होता है, उन लोगों ने अंधे को फोड़ लिया है।

भैरों-मुझे भी यही संदेह होता है।

जगधार-सूरदास फूटनेवाला आदमी नहीं है।

बजरंगी-कभी नहीं।

ठाकुरदीन-ऐसा स्वभाव तो नहीं है, पर कौन जाने। किसी की नहीं चलाई जाती। मेरे ही घर चोरी हुई, तो क्या बाहर के चोर थे? पड़ोसियों की करतूत थी। पूरे एक हजार का माल उठ गया। और वहीं के लोग,


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था। धमकी से भी कोई काम न निकल सकता था। नायकराम ने उस पर लगे हुए कलंक का समर्थन करके उसे परास्त करने का निश्चय किया। बोला-मालूम होता है, उन लोगों ने अंधे को फोड़ लिया है।

भैरों-मुझे भी यही संदेह होता है।

जगधार-सूरदास फूटनेवाला आदमी नहीं है।

बजरंगी-कभी नहीं।

ठाकुरदीन-ऐसा स्वभाव तो नहीं है, पर कौन जाने। किसी की नहीं चलाई जाती। मेरे ही घर चोरी हुई, तो क्या बाहर के चोर थे? पड़ोसियों की करतूत थी। पूरे एक हजार का माल उठ गया। और वहीं के लोग,


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