रंगभूमि - Rangbhumi


नायकराम-जो आदमी किसी की बहू-बेटी पर बुरी निगाह करे, उसके घर में आग लगाना बुरा नहीं। मुझे पहले तो विश्वास नहीं आता था;पर आज उसके मिजाज का रंग बदला हुआ है।

बजरंगी-पंडाजी, सूर को तुम आज 30 बरसों से देख रहे हो। ऐसी बात न कहो।

जगधार-सूरे में और चाहे जितनी बुराइयाँ हों, यह बुराई नहीं है।

भैरों-मुझे ऐसा जान पड़ता है कि हमने हक-नाहक उस पर कलंक लगाया। सुभागी आज सबेरे आकर मेरे पैरों पर गिर पड़ी और तब से घर से बाहर नहीं निकली। सारे दिन अम्माँ की सेवा-टहल करती रही।


678 of 2783


नायकराम-जो आदमी किसी की बहू-बेटी पर बुरी निगाह करे, उसके घर में आग लगाना बुरा नहीं। मुझे पहले तो विश्वास नहीं आता था;पर आज उसके मिजाज का रंग बदला हुआ है।

बजरंगी-पंडाजी, सूर को तुम आज 30 बरसों से देख रहे हो। ऐसी बात न कहो।

जगधार-सूरे में और चाहे जितनी बुराइयाँ हों, यह बुराई नहीं है।

भैरों-मुझे ऐसा जान पड़ता है कि हमने हक-नाहक उस पर कलंक लगाया। सुभागी आज सबेरे आकर मेरे पैरों पर गिर पड़ी और तब से घर से बाहर नहीं निकली। सारे दिन अम्माँ की सेवा-टहल करती रही।


678 of 2783