जॉन सेवक-मैं तो दिखा दूँगा कि यह तुम्हारा भ्रम है। बतलाओ, तुम्हें क्या एतराज है?
बजरंगी-पंडाजी के हजारों यात्री आते हैं, वे इसी मैदान में ठहरते हैं। दस-दस, बीस-बीस दिन पड़े रहते हैं, वहीं खाना बनाते हैं, वहीं सोते भी हैं। सहर के धरमसालों में देहात के लोगों को आराम कहाँ? यह जमीन न रहे, तो कोई यात्री यहाँ झाँकने भी न आए।
जॉन सेवक-यात्रीयों के लिए, सड़क के किनारे, खपरैल के मकान बनवा दिए जाएँ, तो कैसा?
बजरंगी-इतने मकान कौन बनवाएगा?
जॉन सेवक-मैं तो दिखा दूँगा कि यह तुम्हारा भ्रम है। बतलाओ, तुम्हें क्या एतराज है?
बजरंगी-पंडाजी के हजारों यात्री आते हैं, वे इसी मैदान में ठहरते हैं। दस-दस, बीस-बीस दिन पड़े रहते हैं, वहीं खाना बनाते हैं, वहीं सोते भी हैं। सहर के धरमसालों में देहात के लोगों को आराम कहाँ? यह जमीन न रहे, तो कोई यात्री यहाँ झाँकने भी न आए।
जॉन सेवक-यात्रीयों के लिए, सड़क के किनारे, खपरैल के मकान बनवा दिए जाएँ, तो कैसा?
बजरंगी-इतने मकान कौन बनवाएगा?