दूसरों को लड़ाकर तमाशा देखना इनका काम है। इतना कह देने में कौन-सी मरजादा घटी जाती है कि बाबा, तुम जीते और मैं हारा।
भैरों-क्यों इतना कह दूँ? बात करने में किसी से कम हूँ क्या?
जगधार-तो ठाकुरदीन, तुम्हीं चुप हो जाओ।
ठाकुरदीन-हाँ जी, चुप न हो जाऊँगा, तो क्या करूँगा। यहाँ आए थे कि कुछ भजन-कीर्तन होगा, सो व्यर्थ का झगड़ा करने लगे। पंडाजी को क्या, इन्हें तो बेहाथ-पैर हिलाए अमिर्तियाँ और लड्डू खाने को मिलते हैं, इन्हें
दूसरों को लड़ाकर तमाशा देखना इनका काम है। इतना कह देने में कौन-सी मरजादा घटी जाती है कि बाबा, तुम जीते और मैं हारा।
भैरों-क्यों इतना कह दूँ? बात करने में किसी से कम हूँ क्या?
जगधार-तो ठाकुरदीन, तुम्हीं चुप हो जाओ।
ठाकुरदीन-हाँ जी, चुप न हो जाऊँगा, तो क्या करूँगा। यहाँ आए थे कि कुछ भजन-कीर्तन होगा, सो व्यर्थ का झगड़ा करने लगे। पंडाजी को क्या, इन्हें तो बेहाथ-पैर हिलाए अमिर्तियाँ और लड्डू खाने को मिलते हैं, इन्हें