रंगभूमि - Rangbhumi

उस दशा में दबना नीति और आचरण के विरुध्द होता। ज्यादती हमारी ओर से हुई, बस यही मेरी जीत थी।

ईश्वर सेवक बोले-ईश्वर, इस पापी को अपनी शरण में ले। बर्फ आजकल बहुत महँगी हो गई है, फिर समझ में नहीं आता, क्यों इतनी निर्दयता से खर्च की जाती है। सुराही का पानी काफी ठंडा होता है।

जॉन सेवक-पापा, क्षमा कीजिए, बिना बर्फ के प्यास ही नहीं बूझती।

ईश्वर सेवक-खुदा ने चाहा बेटा, तो उस जमीन का मुआमला तय हो जाएगा। आज तुमने बड़ी चतुरता से काम किया।


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उस दशा में दबना नीति और आचरण के विरुध्द होता। ज्यादती हमारी ओर से हुई, बस यही मेरी जीत थी।

ईश्वर सेवक बोले-ईश्वर, इस पापी को अपनी शरण में ले। बर्फ आजकल बहुत महँगी हो गई है, फिर समझ में नहीं आता, क्यों इतनी निर्दयता से खर्च की जाती है। सुराही का पानी काफी ठंडा होता है।

जॉन सेवक-पापा, क्षमा कीजिए, बिना बर्फ के प्यास ही नहीं बूझती।

ईश्वर सेवक-खुदा ने चाहा बेटा, तो उस जमीन का मुआमला तय हो जाएगा। आज तुमने बड़ी चतुरता से काम किया।


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