प्रभु सेवक-कुछ हो, चिंता से तो मुक्त हूँ, स्वच्छंद तो हूँ!
सोफ़िया-जहाँ आत्मा और सिध्दांतों की हत्या होती हो, वहाँ से स्वच्छंदता कोसों भागती है। मैं इसे स्वच्छंदता नहीं कहती, यह निर्लज्जता है। माता-पिता की निर्दयता कम पीड़ाजनक नहीं होती, बल्कि दूसरों का अत्याचार इतना असह्य नहीं होता, जितना माता-पिता का।
प्रभु सेवक-उँह, देखा जाएगा, सिर पर जो आ जाएगी, झेल लूँगा, मरने के पहले ही क्यों रोऊँ?
यह कहकर प्रभु सेवक ने
प्रभु सेवक-कुछ हो, चिंता से तो मुक्त हूँ, स्वच्छंद तो हूँ!
सोफ़िया-जहाँ आत्मा और सिध्दांतों की हत्या होती हो, वहाँ से स्वच्छंदता कोसों भागती है। मैं इसे स्वच्छंदता नहीं कहती, यह निर्लज्जता है। माता-पिता की निर्दयता कम पीड़ाजनक नहीं होती, बल्कि दूसरों का अत्याचार इतना असह्य नहीं होता, जितना माता-पिता का।
प्रभु सेवक-उँह, देखा जाएगा, सिर पर जो आ जाएगी, झेल लूँगा, मरने के पहले ही क्यों रोऊँ?
यह कहकर प्रभु सेवक ने