मैं इस कृपा के लिए जीवन-पर्यंत तुम्हारी आभारी रहँगी।
सोफी ने कातर स्वर में कहा-आपकी आज्ञा पालन करूँगी।
रानी-नहीं, केवल मेरी आज्ञा का पालन करना काफी नहीं है। अगर उससे यह भासित हुआ कि किसी की प्रेरणा से लिखा गया है, तो उसका असर जाता रहेगा।
सोफ़िया-आपको पत्र लिखकर दिखा दूँ?
रानी-नहीं, तुम्हीं भेज देना।
सोफ़िया जब वहाँ से आकर पत्र लिखने बैठी, तो उसे सूझता ही न था कि क्या लिखूँ। सोचने लगी-वह मुझे निर्मम समझेंगे; अगर लिख दूँ,
मैं इस कृपा के लिए जीवन-पर्यंत तुम्हारी आभारी रहँगी।
सोफी ने कातर स्वर में कहा-आपकी आज्ञा पालन करूँगी।
रानी-नहीं, केवल मेरी आज्ञा का पालन करना काफी नहीं है। अगर उससे यह भासित हुआ कि किसी की प्रेरणा से लिखा गया है, तो उसका असर जाता रहेगा।
सोफ़िया-आपको पत्र लिखकर दिखा दूँ?
रानी-नहीं, तुम्हीं भेज देना।
सोफ़िया जब वहाँ से आकर पत्र लिखने बैठी, तो उसे सूझता ही न था कि क्या लिखूँ। सोचने लगी-वह मुझे निर्मम समझेंगे; अगर लिख दूँ,