रानी ने फिर कहा-उसे मैंने अलग रख दिया है, मँगवा दूँ?
सोफ़िया ने उत्तर न दिया। उसके सिर में चक्कर-सा आने लगा। मालूम हुआ, कमरा घूम रहा है।
रानी ने तीसरा बाण चलाया-क्या यही सत्य की मीमांसा है?
सोफ़िया मूर्छित होकर फर्श पर गिर पड़ी।
अध्याय 14
सोफ़िया को होश आया तो वह अपने कमरे में चारपाई पर पड़ी हुई थी। कानों में रानी के अंतिम शब्द गूँज रहे थे-क्या यही सत्य की मीमांसा है? वह अपने को इस समय इतनी नीच समझ रही थी कि घर का मेहतर भी उसे गालियाँ देता,
रानी ने फिर कहा-उसे मैंने अलग रख दिया है, मँगवा दूँ?
सोफ़िया ने उत्तर न दिया। उसके सिर में चक्कर-सा आने लगा। मालूम हुआ, कमरा घूम रहा है।
रानी ने तीसरा बाण चलाया-क्या यही सत्य की मीमांसा है?
सोफ़िया मूर्छित होकर फर्श पर गिर पड़ी।
अध्याय 14
सोफ़िया को होश आया तो वह अपने कमरे में चारपाई पर पड़ी हुई थी। कानों में रानी के अंतिम शब्द गूँज रहे थे-क्या यही सत्य की मीमांसा है? वह अपने को इस समय इतनी नीच समझ रही थी कि घर का मेहतर भी उसे गालियाँ देता,