नहीं तो क्या आज मुझसे यह पूछा जाता-क्या यही सत्य की मीमांसा है?
उसने सिरहाने की ओर देखा। अलमारियों पर धर्म-ग्रंथ सजे हुए रखे थे। उन ग्रंथों की ओर ताकने की हिम्मत न पड़ी। यही मेरे स्वाध्याय का फल है! मैं सत्य की मीमांसा करने चली थी और इस बुरी तरह गिरी कि अब उठना कठिन है।
सामने दीवार पर बुध्द भगवान् का चित्र लटक रहा था। उनके मुख पर कितना तेज था! सोफ़िया की ऑंखें झुक गईं। उनकी ओर ताकते हुए उसे लज्जा आती थी। बुध्द के
नहीं तो क्या आज मुझसे यह पूछा जाता-क्या यही सत्य की मीमांसा है?
उसने सिरहाने की ओर देखा। अलमारियों पर धर्म-ग्रंथ सजे हुए रखे थे। उन ग्रंथों की ओर ताकने की हिम्मत न पड़ी। यही मेरे स्वाध्याय का फल है! मैं सत्य की मीमांसा करने चली थी और इस बुरी तरह गिरी कि अब उठना कठिन है।
सामने दीवार पर बुध्द भगवान् का चित्र लटक रहा था। उनके मुख पर कितना तेज था! सोफ़िया की ऑंखें झुक गईं। उनकी ओर ताकते हुए उसे लज्जा आती थी। बुध्द के