जिसकी याद अभी तक दिल से न मिटी थी। वह फूट-फूट रोने लगी। लेकिन माता की ऑंखों में ऑंसू न थे। वह तो मिस्टर क्लार्क के निमंत्रण का सुख-सम्वाद सुनाने के लिए अधीर हो रही थीं। ज्यों ही सोफ़िया के ऑंसू थमे, मिसेज़ सेवक ने कहा-आज तुम्हें मेरे साथ चलना होगा। मिस्टर क्लार्क ने तुम्हें अपने यहाँ निमंत्रित किया है।
सोफ़िया ने उत्तर न दिया। उसे माता की यह बात भद्दी मालूम हुई।
मिसेज़ सेवक ने फिर कहा-जब से तुम यहाँ आई हो, वह कई बार
जिसकी याद अभी तक दिल से न मिटी थी। वह फूट-फूट रोने लगी। लेकिन माता की ऑंखों में ऑंसू न थे। वह तो मिस्टर क्लार्क के निमंत्रण का सुख-सम्वाद सुनाने के लिए अधीर हो रही थीं। ज्यों ही सोफ़िया के ऑंसू थमे, मिसेज़ सेवक ने कहा-आज तुम्हें मेरे साथ चलना होगा। मिस्टर क्लार्क ने तुम्हें अपने यहाँ निमंत्रित किया है।
सोफ़िया ने उत्तर न दिया। उसे माता की यह बात भद्दी मालूम हुई।
मिसेज़ सेवक ने फिर कहा-जब से तुम यहाँ आई हो, वह कई बार