रंगभूमि - Rangbhumi

तो शायद आप मुझे याद भी न करतीं?

मिसेज़ सेवक ने अवरुध्द कंठ से कहा-मेरे मन में जो कुछ है, वह तो ईश्वर ही जानता है; पर ऐसा कोई दिन नहीं जाता कि मैं तुम्हारे और प्रभु के लिए ईश्वर से प्रार्थना न करती होऊँ। यह उन्हीं प्रार्थनाओं का शुभ फल है कि तुम्हें यह अवसर मिला है।

यह कहकर मिसेज़ सेवक जाह्नवी से मिलने गईं। रानी ने उनका विशेष आदर न किया। अपनी जगह पर बैठे-बैठे बोलीं-आपके दर्शन तो बहुत दिनों के बाद हुए।

मिसेज़ सेवक


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तो शायद आप मुझे याद भी न करतीं?

मिसेज़ सेवक ने अवरुध्द कंठ से कहा-मेरे मन में जो कुछ है, वह तो ईश्वर ही जानता है; पर ऐसा कोई दिन नहीं जाता कि मैं तुम्हारे और प्रभु के लिए ईश्वर से प्रार्थना न करती होऊँ। यह उन्हीं प्रार्थनाओं का शुभ फल है कि तुम्हें यह अवसर मिला है।

यह कहकर मिसेज़ सेवक जाह्नवी से मिलने गईं। रानी ने उनका विशेष आदर न किया। अपनी जगह पर बैठे-बैठे बोलीं-आपके दर्शन तो बहुत दिनों के बाद हुए।

मिसेज़ सेवक


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