व्यस्त थे कि मिसेज़ सेवक की ओर किसी ने धयान न दिया। आखिर वह बोलीं-डॉक्टर साहब, आपका कब जाने का विचार है?
कुँवर साहब ने मिसेज़ सेवक की तरफ देखा और बड़े तपाक से आगे बढ़कर हाथ मिलाया, कुशल-समाचार पूछा और ले जाकर एक कुर्सी पर बैठा दिया। सोफ़िया माँ के पीछे जाकर खड़ी हो गई।
कुँवर साहब-ये लोग गढ़वाल जा रहे हैं। आपने पत्रों में देखा होगा, वहाँ लोगों पर कितना घोर संकट पड़ा हुआ है।
मिसेज़ सेवक-खुदा इन लोगों का उद्योग सफल करें। इनके त्याग की जितनी भी प्रशंसा की जाए,
व्यस्त थे कि मिसेज़ सेवक की ओर किसी ने धयान न दिया। आखिर वह बोलीं-डॉक्टर साहब, आपका कब जाने का विचार है?
कुँवर साहब ने मिसेज़ सेवक की तरफ देखा और बड़े तपाक से आगे बढ़कर हाथ मिलाया, कुशल-समाचार पूछा और ले जाकर एक कुर्सी पर बैठा दिया। सोफ़िया माँ के पीछे जाकर खड़ी हो गई।
कुँवर साहब-ये लोग गढ़वाल जा रहे हैं। आपने पत्रों में देखा होगा, वहाँ लोगों पर कितना घोर संकट पड़ा हुआ है।
मिसेज़ सेवक-खुदा इन लोगों का उद्योग सफल करें। इनके त्याग की जितनी भी प्रशंसा की जाए,