उग्र नीति के अनुयायियों को उन पर उँगली उठाने का अवसर मिलता था। उनमें यदि कोई कमजोरी थी, तो यह कि वह सम्मान-लोलुप मनुष्य थे; और ऐसे अन्य मनुष्यों की भाँति वह बहुत औचित्य की दृष्टि से नहीं,ख्याति लाभ की दृष्टि से अपने आचरण का निश्चय करते थे। पहले उन्होंने न्याय-पक्ष लेकर जॉन सेवक को सूरदास की जमीन दिलाने से इनकार कर दिया था; पर अब उन्हें इसके विरुध्द आचरण करने के लिए बाधय होना पड़ रहा था। अपने सहवर्गियों को समझाने के लिए
उग्र नीति के अनुयायियों को उन पर उँगली उठाने का अवसर मिलता था। उनमें यदि कोई कमजोरी थी, तो यह कि वह सम्मान-लोलुप मनुष्य थे; और ऐसे अन्य मनुष्यों की भाँति वह बहुत औचित्य की दृष्टि से नहीं,ख्याति लाभ की दृष्टि से अपने आचरण का निश्चय करते थे। पहले उन्होंने न्याय-पक्ष लेकर जॉन सेवक को सूरदास की जमीन दिलाने से इनकार कर दिया था; पर अब उन्हें इसके विरुध्द आचरण करने के लिए बाधय होना पड़ रहा था। अपने सहवर्गियों को समझाने के लिए