वह हमीं से ले लीजिए, और उनसे कह दीजिए, जमीन न मिलेगी। आप लोग झाँसेबाज हैं, ऐसा झाँसा दीजिए कि साहब की अकिल गुम हो जाए।
ताहिर-खैरख्वाही रुपये के लालच से नहीं है। अपने मालिक की ऑंख बचाकर एक कौड़ी भी लेना हराम समझता हूँ। खैरख्वाही इसलिए करता हूँ कि उनका नमक खाता हूँ।
जगधार-अच्छा साहब, भूल हुई, माफ कीजिए। मैंने तो संसार के चलन की बात कही थी।
ताहिर-तो सूरदास, मैं साहब से जाकर क्या कह दूँ?
सूरदास-बस, यही कह दीजिए कि जमीन न बिकेगी।
वह हमीं से ले लीजिए, और उनसे कह दीजिए, जमीन न मिलेगी। आप लोग झाँसेबाज हैं, ऐसा झाँसा दीजिए कि साहब की अकिल गुम हो जाए।
ताहिर-खैरख्वाही रुपये के लालच से नहीं है। अपने मालिक की ऑंख बचाकर एक कौड़ी भी लेना हराम समझता हूँ। खैरख्वाही इसलिए करता हूँ कि उनका नमक खाता हूँ।
जगधार-अच्छा साहब, भूल हुई, माफ कीजिए। मैंने तो संसार के चलन की बात कही थी।
ताहिर-तो सूरदास, मैं साहब से जाकर क्या कह दूँ?
सूरदास-बस, यही कह दीजिए कि जमीन न बिकेगी।