डरी कि कहीं सलाह करते-करते वाद-विवाद न होने लगे। बोली-काम तो कुछ नहीं कर रही हूँ; लेकिन मैं आपको कोई सलाह देने के योग्य नहीं हूँ। परमात्मा ने मुझे इतनी बुध्दि नहीं दी। मुझे तो उन्होंने केवल खाने, सोने और आपको दिक करने के लिए बनाया है।
राजा साहब-तुम्हारे दिक करने ही में तो मजा मिलता है। बतलाओ, सूरदास की जमीन के बारे में तुम्हारी क्या राय है? तुम मेरी जगह होतीं तो क्या करतीं?
इंदु-आखिर आपने क्या निश्चय किया?
राजा साहब-पहले तुम बताओ, तो फिर मैं बताऊँगा।
डरी कि कहीं सलाह करते-करते वाद-विवाद न होने लगे। बोली-काम तो कुछ नहीं कर रही हूँ; लेकिन मैं आपको कोई सलाह देने के योग्य नहीं हूँ। परमात्मा ने मुझे इतनी बुध्दि नहीं दी। मुझे तो उन्होंने केवल खाने, सोने और आपको दिक करने के लिए बनाया है।
राजा साहब-तुम्हारे दिक करने ही में तो मजा मिलता है। बतलाओ, सूरदास की जमीन के बारे में तुम्हारी क्या राय है? तुम मेरी जगह होतीं तो क्या करतीं?
इंदु-आखिर आपने क्या निश्चय किया?
राजा साहब-पहले तुम बताओ, तो फिर मैं बताऊँगा।