रंगभूमि - Rangbhumi



इंदु ने चिंतित स्वर में कहा-मैं नहीं जानती थी कि प्रधान की दशा इतनी शोचनीय होती है।

राजा साहब-अब तो मालूम हो गया। बतलाओ, अब मुझे क्या करना चाहिए?

इंदु-पद-त्याग।

राजा साहब-मेरे पद त्याग से जमीन बच सकेगी?

इंदु-आप दोष-पाप से तो मुक्त हो जाएँगे!

राजा साहब-ऐसी गौण बातों के लिए पद-त्याग हास्यजनक है।

इंदु को अपने पति के प्रधान होने का बड़ा गर्व था। इस पद को वह बहुत श्रेष्ठ और आदरणीय समझती थी। उसका ख्याल था कि यहाँ राजा साहब पूर्ण रूप से स्वतंत्रा हैं,


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इंदु ने चिंतित स्वर में कहा-मैं नहीं जानती थी कि प्रधान की दशा इतनी शोचनीय होती है।

राजा साहब-अब तो मालूम हो गया। बतलाओ, अब मुझे क्या करना चाहिए?

इंदु-पद-त्याग।

राजा साहब-मेरे पद त्याग से जमीन बच सकेगी?

इंदु-आप दोष-पाप से तो मुक्त हो जाएँगे!

राजा साहब-ऐसी गौण बातों के लिए पद-त्याग हास्यजनक है।

इंदु को अपने पति के प्रधान होने का बड़ा गर्व था। इस पद को वह बहुत श्रेष्ठ और आदरणीय समझती थी। उसका ख्याल था कि यहाँ राजा साहब पूर्ण रूप से स्वतंत्रा हैं,


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