डाकिया-इधार जानवर बहुत हैं, अभी कल एक गाय उठा ले गए।
विनय-मुझे जानवर भी न पूछेंगे। तुम जाओ, मुझे यहीं छोड़ दो।
डाकिया-यह नहीं हो सकता, मैं भी यहीं पड़ रहूँगा।
विनय-तुम मेरे लिए क्यों अपनी जान संकट में डालते हो? चले जाओ, घड़ी रात गए तक पहुँच जाओगे।
डाकिया-मैं तो तभी जाऊँगा, जब आप भी चलेंगे। मेरी जान की कौन हस्ती है। अपना पेट पालने के सिवा और क्या करता हूँ। आपके दम से हजारों का भला होता है। जब आपको अपनी चिंता नहीं है, तो मुझे अपनी क्या चिंता है।
डाकिया-इधार जानवर बहुत हैं, अभी कल एक गाय उठा ले गए।
विनय-मुझे जानवर भी न पूछेंगे। तुम जाओ, मुझे यहीं छोड़ दो।
डाकिया-यह नहीं हो सकता, मैं भी यहीं पड़ रहूँगा।
विनय-तुम मेरे लिए क्यों अपनी जान संकट में डालते हो? चले जाओ, घड़ी रात गए तक पहुँच जाओगे।
डाकिया-मैं तो तभी जाऊँगा, जब आप भी चलेंगे। मेरी जान की कौन हस्ती है। अपना पेट पालने के सिवा और क्या करता हूँ। आपके दम से हजारों का भला होता है। जब आपको अपनी चिंता नहीं है, तो मुझे अपनी क्या चिंता है।