रंगभूमि - Rangbhumi

तान आकाश-मंडल में यों नृत्य करती हुई मालूम होती थी, जैसे प्रकाश-ज्योति जल के अंतस्तल में नृत्य करती है-

''झीनी-झीनी बीनी चदरिया।

काहे कै ताना, काहे कै भरनी, कौन तार से बीनी चदरिया?

इँगला-पिंगला ताना-भरनी, सुखमन तार से बीनी चदरिया।

आठ कँवल-दस-चरखा डोले, पाँच तत्ता, गुन तीनी चदरिया;

साईं को सियत मास दस लागै, ठोक-ठोक कै बीनी चदरिया।

सो चादर सुर-नर-मुनि ओढ़ैं, ओढ़िकै मैली कीनी चदरिया;

दास कबीर जतन से ओढ़ी, ज्यों-की-त्यों धार दीनी चदरिया।''


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तान आकाश-मंडल में यों नृत्य करती हुई मालूम होती थी, जैसे प्रकाश-ज्योति जल के अंतस्तल में नृत्य करती है-

''झीनी-झीनी बीनी चदरिया।

काहे कै ताना, काहे कै भरनी, कौन तार से बीनी चदरिया?

इँगला-पिंगला ताना-भरनी, सुखमन तार से बीनी चदरिया।

आठ कँवल-दस-चरखा डोले, पाँच तत्ता, गुन तीनी चदरिया;

साईं को सियत मास दस लागै, ठोक-ठोक कै बीनी चदरिया।

सो चादर सुर-नर-मुनि ओढ़ैं, ओढ़िकै मैली कीनी चदरिया;

दास कबीर जतन से ओढ़ी, ज्यों-की-त्यों धार दीनी चदरिया।''


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