शीध्र ही उन्होंने भी अपनी पुस्तकें दे दी और अन्य लोंगों की तरह पढ़ने का अधिकार प्राप्त किया। आगे चलकर पर्यवेक्षक भी इस संस्था पर गर्व से सिर ऊंचा
करने लगे। उन्होंने गं्रथालय के लिए आलमारियां दी। एक स्वतंत्र स्थान दिया और फटी हुई पुस्तकों की सिलाई तथा उनकी यथोचित देखभाल करने के लिए दो-तीन राजबंदियों को नियुक्त किया। वे पुस्तकों की जिल्दसाजी का काम इतना बढ़िया करने लगे कि सरकारी कार्यालय से भी बड़े-बड़े गं्रथ वहीं जिल्द
शीध्र ही उन्होंने भी अपनी पुस्तकें दे दी और अन्य लोंगों की तरह पढ़ने का अधिकार प्राप्त किया। आगे चलकर पर्यवेक्षक भी इस संस्था पर गर्व से सिर ऊंचा
करने लगे। उन्होंने गं्रथालय के लिए आलमारियां दी। एक स्वतंत्र स्थान दिया और फटी हुई पुस्तकों की सिलाई तथा उनकी यथोचित देखभाल करने के लिए दो-तीन राजबंदियों को नियुक्त किया। वे पुस्तकों की जिल्दसाजी का काम इतना बढ़िया करने लगे कि सरकारी कार्यालय से भी बड़े-बड़े गं्रथ वहीं जिल्द