कुछ ग्रंथ, कुछ क्रमिक पुस्तकें मंगवाकर हमने ही गं्रथालय में रखी। परंतु आगे चलकर ढेर सारी हिंदी तथा पंजाबी भाषी राजबंदी आ गए और उन दो राज्यों की काफी पुस्तकें भी आने लगी।
अंगे्रजी पुस्तकों की भरमार तो जैसे रीढ़ की हड्डी ही थी। स्पेंसर की दोनों मीमांसाएं, समाजशास्त्र के उसके सभी खंड, लगभग संपूर्ण हर्बर्ट स्पेंसर, मिल, गिबन के इतिहास, शेक्सपीयर, मिल्टन, पोप के समग्र गं्रथ, अबाट के नेपोलियन, डार्विन, हक्स्ले, हीगेल, इमर्सन की प्रायः सारी पुस्तकें वहां थी। कार्लाइल,
कुछ ग्रंथ, कुछ क्रमिक पुस्तकें मंगवाकर हमने ही गं्रथालय में रखी। परंतु आगे चलकर ढेर सारी हिंदी तथा पंजाबी भाषी राजबंदी आ गए और उन दो राज्यों की काफी पुस्तकें भी आने लगी।
अंगे्रजी पुस्तकों की भरमार तो जैसे रीढ़ की हड्डी ही थी। स्पेंसर की दोनों मीमांसाएं, समाजशास्त्र के उसके सभी खंड, लगभग संपूर्ण हर्बर्ट स्पेंसर, मिल, गिबन के इतिहास, शेक्सपीयर, मिल्टन, पोप के समग्र गं्रथ, अबाट के नेपोलियन, डार्विन, हक्स्ले, हीगेल, इमर्सन की प्रायः सारी पुस्तकें वहां थी। कार्लाइल,