इन ढोंगियों के कौन से रोग सच हैं और कौन से मिथ्या। अतः याद रखिए, वे तभी बीमार पडे़ंगे जब मैं कहूंगा, समझे?’ इतना कहकर अपने विनोद पर स्वयं ही बत्तीसी निकालते हुए बारी आगे बढ़ जाता। एक बार एक डाॅक्टर (हाॅस्पिटल असिस्टेंट) ने मेरे बंधु की वह अत्यंत दयनीय
दशा देखी। सिर की पीड़ा असहनीय होने पर वे कभी-कभी दीवार से अपना सिर टकराते। फिर उठकर वैसे ही कोल्हू घुमाते। डाॅक्टर ने साहस करके कहा,‘‘ चलो, मैं दो दिन आपको अपने अधिकार में
इन ढोंगियों के कौन से रोग सच हैं और कौन से मिथ्या। अतः याद रखिए, वे तभी बीमार पडे़ंगे जब मैं कहूंगा, समझे?’ इतना कहकर अपने विनोद पर स्वयं ही बत्तीसी निकालते हुए बारी आगे बढ़ जाता। एक बार एक डाॅक्टर (हाॅस्पिटल असिस्टेंट) ने मेरे बंधु की वह अत्यंत दयनीय
दशा देखी। सिर की पीड़ा असहनीय होने पर वे कभी-कभी दीवार से अपना सिर टकराते। फिर उठकर वैसे ही कोल्हू घुमाते। डाॅक्टर ने साहस करके कहा,‘‘ चलो, मैं दो दिन आपको अपने अधिकार में