उन राजबंदियों की संगत में रखा जाता जो पालतू बन गए हैं। तथापि किसी भी राजबंदी को सतत एक ही विभाग में और एक ही संघ में रखना सुरक्षित न समझते हुए एक महीने के पश्चात् उसके रहने की कोठरियां बदल दी जाती थी।
बंदीगृह में उत्सव
यह बदली का दिवस माना जाता था, क्यांेकि उस बदली के बहाने कोठरी से बाहर निकलने पर लगभग आधा दिन तो उस धांधली में निकल ही जाता। दूसरी बात, इस कारण जेल का चक्कर लगाना पड़ता। एक विभाग से दूसरी ओर जाते-जाते
उन राजबंदियों की संगत में रखा जाता जो पालतू बन गए हैं। तथापि किसी भी राजबंदी को सतत एक ही विभाग में और एक ही संघ में रखना सुरक्षित न समझते हुए एक महीने के पश्चात् उसके रहने की कोठरियां बदल दी जाती थी।
बंदीगृह में उत्सव
यह बदली का दिवस माना जाता था, क्यांेकि उस बदली के बहाने कोठरी से बाहर निकलने पर लगभग आधा दिन तो उस धांधली में निकल ही जाता। दूसरी बात, इस कारण जेल का चक्कर लगाना पड़ता। एक विभाग से दूसरी ओर जाते-जाते