प्रश्न नहीं होता। आज या कल सारे मुक्त होंगे। फिर अब मुझसे ईष्र्या रखकर भला ं ं ंखान को क्या मिलेगा? हां, कदाचित् मेरी मुक्ति के पश्चात् बैरिस्टर होने के नाते उसके किसी नए डाकेजनी के कांड में यदि उस पर कोई अभियोग लग जाए तो मैं काम भी आ सकता हूं न! कैसे कहंे? नहीं, इस तरह के प्रकट अनुरोध, प्राथनाएं भी हमेशा की जाती। अतः मुझसे अब स्नेह रखना ही लाभदायक होने से या वैसा करना करना कम-से-कम हानिकारक न होने के कारण ं ं ं खान मेरा
प्रश्न नहीं होता। आज या कल सारे मुक्त होंगे। फिर अब मुझसे ईष्र्या रखकर भला ं ं ंखान को क्या मिलेगा? हां, कदाचित् मेरी मुक्ति के पश्चात् बैरिस्टर होने के नाते उसके किसी नए डाकेजनी के कांड में यदि उस पर कोई अभियोग लग जाए तो मैं काम भी आ सकता हूं न! कैसे कहंे? नहीं, इस तरह के प्रकट अनुरोध, प्राथनाएं भी हमेशा की जाती। अतः मुझसे अब स्नेह रखना ही लाभदायक होने से या वैसा करना करना कम-से-कम हानिकारक न होने के कारण ं ं ं खान मेरा