गया। स्वदेश की समस्या का यदि इस तरह सफलतापूर्वक समाधान मिल रहा हो तो हमारी मुक्ति न हो, न सही। इस तरह के उद्गार उस युवा संघ के हर किसी के मुख से निकल रहे थे। बंगाल का विभाजन क्या? उसके स्थगित होने का यह आनुषंगिक संतोष था। परंतु वास्तविक संतोष यह था कि वहीं करने के लिए बाध्य किया जाएगा जो हम चाहेंगे। कुछ लोगों ने पूछा, ‘‘परंतु इस यःकश्चित् खिलौने से संतुष्ट होकर कि बंगाल का विभाजन रद्द हो गया ं ं ं पुनः। ‘‘मैंने कहा,‘‘नहीं,
गया। स्वदेश की समस्या का यदि इस तरह सफलतापूर्वक समाधान मिल रहा हो तो हमारी मुक्ति न हो, न सही। इस तरह के उद्गार उस युवा संघ के हर किसी के मुख से निकल रहे थे। बंगाल का विभाजन क्या? उसके स्थगित होने का यह आनुषंगिक संतोष था। परंतु वास्तविक संतोष यह था कि वहीं करने के लिए बाध्य किया जाएगा जो हम चाहेंगे। कुछ लोगों ने पूछा, ‘‘परंतु इस यःकश्चित् खिलौने से संतुष्ट होकर कि बंगाल का विभाजन रद्द हो गया ं ं ं पुनः। ‘‘मैंने कहा,‘‘नहीं,