दलिए में मिट्टी का तेल गिर जाता। दलिया बड़े सवेरे पकाया जाता। एक महाकाव्य डेगची चूल्हे पर चढ़ाई जाती और उसमें दलिया पकता। मुंह अंधेरे यह देखने के लिए कि वह ठीक पका है या नहीं, रसोइया हाथ में मिट्टी के तेल की टीन की ढिबरी थामे, उन्नींदी अवस्था में ही उस डेगची में झांकता। उस समय दो कौड़ी की उस टूटी-फूटी ढिबरी से तेल चूने लगता और उसे तिरछी पकड़ने से देखते-देखते सारा तेल दलिए में गिरता। परंतु आठ सौ लोगों के लिए तेयार किया हुआ
दलिए में मिट्टी का तेल गिर जाता। दलिया बड़े सवेरे पकाया जाता। एक महाकाव्य डेगची चूल्हे पर चढ़ाई जाती और उसमें दलिया पकता। मुंह अंधेरे यह देखने के लिए कि वह ठीक पका है या नहीं, रसोइया हाथ में मिट्टी के तेल की टीन की ढिबरी थामे, उन्नींदी अवस्था में ही उस डेगची में झांकता। उस समय दो कौड़ी की उस टूटी-फूटी ढिबरी से तेल चूने लगता और उसे तिरछी पकड़ने से देखते-देखते सारा तेल दलिए में गिरता। परंतु आठ सौ लोगों के लिए तेयार किया हुआ