बारी साहब को बाहर जाने के लिए कहा और उस क्लर्क को धमकाया कि ‘सच बताओ, सच क्या है।’ तब तुरत ही कांपते हुए उसने कहा, ‘‘सरकार, हम बंदियों को वही करना पड़ता है, जो बारी साहब कहते हैं। यह सच है कि मैंने कल्पना के आधार पर वह पत्र बंगला में पढ़ा। परंतु वह पत्र बंगला में नहीं है। बारी ने आदेश दिया, कंठस्थ करके ऐसे पढ़ते जाओ, जैसे वह बंगला में है, इसीलिए मैंने वैसे
पढ़ा।’’ पर्यवेक्षक का पारा चढ़ गया। परंतु बारी पर आंच न आए, इसीलिए
बारी साहब को बाहर जाने के लिए कहा और उस क्लर्क को धमकाया कि ‘सच बताओ, सच क्या है।’ तब तुरत ही कांपते हुए उसने कहा, ‘‘सरकार, हम बंदियों को वही करना पड़ता है, जो बारी साहब कहते हैं। यह सच है कि मैंने कल्पना के आधार पर वह पत्र बंगला में पढ़ा। परंतु वह पत्र बंगला में नहीं है। बारी ने आदेश दिया, कंठस्थ करके ऐसे पढ़ते जाओ, जैसे वह बंगला में है, इसीलिए मैंने वैसे
पढ़ा।’’ पर्यवेक्षक का पारा चढ़ गया। परंतु बारी पर आंच न आए, इसीलिए